2003 का वर्ल्ड कप आखिर क्यों था सबसे बढ़िया वर्ल्ड कप?

2003 का वर्ल्ड कप आखिर क्यों था सबसे बढ़िया वर्ल्ड कप?

2003 का वर्ल्ड कप 

2003 क्रिकेट विश्व कप (आधिकारिक रूप से आईसीसी क्रिकेट विश्व कप 2003 के रूप में जाना जाता है) यह अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) द्वारा आयोजित आठवां क्रिकेट विश्व कप था। इस मैच को ९ फ़रवरी २००३ से  २३ मार्च २००३ तक दक्षिण अफ्रीका ,जिम्बावे और केन्या के द्वारा आयोजित किया गया था और यह विश्व कप का यह मैच  पहली बार अफ्रीका में खेला गया था।

2003 का वर्ल्ड कप

 टूर्नामेंट में 14 टीमों ने भाग लिया, जो उस समय विश्व कप के इतिहास में सबसे बड़ी संख्या थी, जिसमें कुल 54 मैच खेले गए थे। इस मैच में  1999 क्रिकेट विश्व कप में खेले गए नियमों का पालन किया गया था , जिसमें  टीमें दो समूहों में विभाजित थीं, और प्रत्येक समूह में शीर्ष तीन सुपर सिक्स चरण के लिए खेले जाने थे 

 यहाँ चार कारण हैं।जो आईएस श्रृंखला की बातों को बताते हैं 

1. इस मैच मे प्रतिष्ठित भारतीय बल्लेबाज ने 2003 के मैच  के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ विश्व कप जीता था। लिटिल मास्टर की बल्लेबाजी इसका एक महत्वपूर्ण कारण थी,  इसलिए इस टूर्नामेंट ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। तेंदुलकर ने लगातार चार बार 50+ स्कोर बनाया। उन्होंने सुपर-सिक्स गेम में श्रीलंका के खिलाफ 97 और केन्या के खिलाफ सेमीफाइनल में 83 रन बनाए। उन्होंने भारत को फाइनल में पहुंचाया। चैंपियन बल्लेबाज ने टूर्नामेंट में अपने 673 रन के लिए “प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट” का पुरस्कार जीता। यह अभी भी एकल विश्व कप संस्करण में किसी बल्लेबाज द्वारा बनाए गए सर्वाधिक रनों का रिकॉर्ड है। जिसे अभी तक कोई नहीं तोड़ सका है .

sachin tendulkar

तेंदुलकर ने मेजबान जिम्बाब्वे के खिलाफ 91 गेंदों पर 81 रनों की पारी खेली और इसके बाद नामीबिया के खिलाफ 151 रनों की पारी खेली जो कि विश्व कप में उनका अब तक का सर्वोच्च स्कोर है। इसके बाद, उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अर्धशतक और पाकिस्तान के खिलाफ 98 रनों की मैच विजयी पारी खेली, जो विश्व कप की उनकी सर्वश्रेष्ठ पारी थी,जिसे आज भी याद किया जाता है .

2.जब भी भारत पाकिस्तान से मैच खेलता है, तो पूरे देश में हलचल मच जाती है क्योंकि हर कोई इस मैच की हर चीज को देखने का गवाह बनना चाहता है . यह मैच न केवल रोमांचकारी होता है बलिक दिल की धडकनों को बढ़ा देने वाला होता है ,लोग अपने अपने टेलीविजन से चिपके हुए इन मैच का आनद लेते हैं . 2003 विश्व कप के इस मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीता और पहले बल्लेबाजी के लिए खुद को चुना .

सलामी बल्लेबाज सईद अनवर ने शतक जड़ा और उन्होंने  उस खेल के मैदान  पर 273 रन बनाने में मदद की। वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर ने सभी मैच के अच्छा खेलते हुए इस मैच के  भारतीय प्रशंसकों के साथ अच्छे पल शेयर किये . जो यादगार पलों में से एक हैं . ट्रॉफी जीतने  के लिए 360 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए, भारतीय सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंदुलकर बल्लेबाजी करने उतरे। और अच्छा खेले .

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saeed anwar

तेंदुलकर और सहवाग गेंदबाजों के इस खेल का  और वसीम अकरम, वकार यूनुस और शोएब अख्तर के पास कोई जवाब नहीं था। 

भारत केवल पांच ओवर में 50 रन पर पहुंच गया। सहवाग और सौरव गांगुली लगातार खेलते हुए एक साथ गेंदों पर आउट हुए लेकिन तेंदुलकर ने अपनी शानदार पारी जारी रखी। मैच का उत्साह बना रहा .

3. 2003 विश्व कप में इंग्लैंड, पाकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और वेस्ट इंडीज जैसे  कई देशों की बड़ी टीमों ने खेला और इसको रोचक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी .  इस टूर्नामेंट में अपना दबदबा बनाने वाली ऑस्ट्रेलिया एक भी गेम गंवाए बिना फाइनल में पहुंच गई। ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाजों ने इस मैच को ठोस शुरुआत दी और इस मैच में उन्होंने  14 ओवर में 100 रन का आंकड़ा पार किया। डेमियन मार्टिन ने रिकी पोंटिंग को शामिल किया और इस जोड़ी ने पार्क के चारों ओर भारतीय गेंदबाजों की धुनाई की। ऑस्ट्रेलियाई कप्तान ने महज 121 गेंदों पर 8 विशाल छक्कों की मदद से 140 रन बनाए। शानदार मैच था यह एक . भारत नियमित रूप से विकेट गंवाता रहा लेकिन सहवाग दूसरे छोर से जाते रहे। अंत में, यह पर्याप्त नहीं था क्योंकि मेन इन ब्लू को 40 ओवर के अंदर 234 रन पर आउट कर दिया गया था। ऑस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरा विश्व कप अपने नाम कियापर टूर्नामेंट शुरू होने के दो दिन बाद एक और झटका लगा, जब शेन वार्न, खेल के प्रमुख स्पिनरों में से एक, एक प्रतिबंधित ड्रग के लिए टेस्ट किया गया जो पॉजिटिव निकला  . टूर्नामेंट को अंततः ऑस्ट्रेलिया ने जीता था, जिन्होंने अपने सभी 11 मैच जीते थे, जोहान्सबर्ग के वांडरर्स स्टेडियम में खेले गए फाइनल में भारत को हराया था। यह ऑस्ट्रेलिया की तीसरी विश्व कप जीत थी, ऐसा करने वाली एकमात्र टीम।

2003 का वर्ल्ड कप

 2003 विश्व कप में खेली गई चौदह टीमें, उस समय क्रिकेट विश्व कप में खेलने वाली टीमों की सबसे बड़ी संख्या थी। 10 टेस्ट खेलने वाले देश स्वतः ही टूर्नामेंट के लिए योग्य हो गए, जिसमें हाल ही में नियुक्त सदस्य बांग्लादेश भी शामिल है, जबकि केन्या ने भी अपने पूर्ण एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय स्थिति के कारण स्वचालित रूप से योग्यता प्राप्त की। अन्य तीन स्पॉट 2001 में कनाडा में ICC ट्रॉफी में शीर्ष तीन टीमों द्वारा भरे गए थे, जो एक क्वालिफाइंग टूर्नामेंट के रूप में कार्य कर रहा था। ये टीमें क्रमशः आईसीसी ट्रॉफी, कनाडा और नामीबिया जीतने वाली नीदरलैंड थीं। यह नामीबिया का विश्व कप डेब्यू था, जबकि नीदरलैंड और कनाडा दोनों दूसरी बार टूर्नामेंट में दिखाई दे रहे थे, जो पहले 1996 और 1979 में दिखाई दिए थे।

1999 के विश्व कप में उपयोग किए गए प्रारूप को बरकरार रखा गया था, 14 टीमों के साथ सात के दो समूहों में विभाजित किया गया था, और प्रत्येक समूह से शीर्ष तीन सुपर छक्के चरण के लिए अर्हता प्राप्त कर रहे थे, उन्होंने अपने समूह से अन्य क्वालीफायर के खिलाफ हासिल किए गए परिणामों को आगे बढ़ाया। सुपर सिक्स में शीर्ष चार टीमों ने सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई किया, और उन मैचों के विजेताओं ने फाइनल मुकाबला किया।

ऑस्ट्रेलिया, भारत, ज़िम्बाब्वे, श्रीलंका, केन्या और न्यूजीलैंड सुपर सिक्स स्टेज में आगे बढ़े। आगे किए गए अंकों की गणना निम्न प्रकार से की गई: एक अन्य क्वालिफायर पर जीत के लिए चार अंक, एक गैर-क्वालीफायर पर एक जीत के लिए, एक टाई के लिए दो या किसी अन्य क्वालीफायर के खिलाफ कोई परिणाम नहीं, एक टाई के लिए 0.5 या एक गैर-क्वालीफायर के खिलाफ कोई परिणाम नहीं। ।

भारत, केवल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार कर दूसरे सर्वश्रेष्ठ टीम के रूप में फाइनल में पहुंचा। सौरव गांगुली ने टॉस जीता और फाइनल में पहले गेंदबाजी करने के लिए का निर्णय लिया । यह एक ऐसा निर्णय निकला, जिस पर वह आने वाले वर्षों के लिए पछतावा रहेगा . असल में पहले गेंदबाजी का फैसला गांगुली ने इसलिए किया था, क्योंकि मैच से पहले सुबह बरसात हुई थी. ऐसे में गांगुली को उम्मीद थी कि पिच की नमी गेंदबाजी में मददगार रहेगी.

गांगुली को भरोसा था कि अगर सही जगह पर गेंदबाजी की जायेगी, तो वह जल्द ही आस्ट्रेलिया की ओपनिंग जोड़ी को आउट करने में कामयाब रहेंगे. हालाँकि, उनका यह दांव उल्टा पड़ गया. भारतीय गेंदबाज बेअसर साबित हुए.

अपने पहले ही ओवर में ज़हीर खान ने काफी रन लुटा डाले थे। इसके बाद ऑस्ट्रेलियाई टीम ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

रिकी पोंटिंग और साथी खिलाड़ियों ने भारतीय गेंदबाजों को मैदान के चारों ओर भगा कर  मनचाहे शॉट लगाए और स्कोर को 359 तक पहुंचा दिया।पर सौरव गांगुली ने विश्व कप 2003 के एक मैच में उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ चार कैच लपके थे और इस प्रक्रिया में किसी विश्व कप मैच में सर्वाधिक कैच लपकने वाले खिलाड़ी बन गए थे। इस वजह से भी यह विश्वकप यादगार बन गया था .युवराज सिंह ने भी २००३ में भारत को फाइनल में पहुँचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी .

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भारत लगातार  अपने विकेट गंवाता रहा लेकिन सहवाग और द्रविड़ लगातार अच्छा खेलते  रहे। वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ के अलावा कोई भी बल्लेबाज़ टिक कर नहीं खेल सका और भारत ने यह मैच 125 रनों से गंवा दिया। अंत में, यह पर्याप्त नहीं था क्योंकि मेन इन ब्लू को 40 ओवर के अंदर 234 रन पर आउट कर दिया गया था। राहुल द्रविड़ ने 2003 विश्व कप में 63.60 के शानदार औसत से 318 रन बनाए थे। वहीं हरभजन सिंह ने 2003 विश्व कप के दौरान 11 विकेट लिए थे वहीँ 2003 वर्ल्ड कप में भारत के लिए सबसे ज्यादा विकेट जहीर खान ने लिए थे। 

पर इतना सब होते हुए भी ऑस्ट्रेलिया ने लगातार दूसरा विश्व कप अपने नाम किया. चाहे यह एक शानदार मैच था ,पर जीत जिसकी मैच भी उसका .बाद में एक बातचीत के दौरान सचिन तेंदुलकर ने बताया था कि वह यह मैच क्यों हारे थे ? असल में उनसे प्रश्न पूछा गया था कि मैच जीतने के लिए क्या जरुरी है ? तभी यह उन्होंने बताया की २००३ का फ़ाइनल में पहुंच कर न जीतने का सबसे बड़ा कारण बहुत जोश में खेलना था ,जैसे हम खेल रहे होते हैं उसी तरह खेले तो जीतने से कोई नहीं रोक सकता ,पर जहाँ हम अति उत्साह में भर जाते हैं तो यही होता है .यही हमारे मैच हारने का कारण बना , १९८३ के बाद भारत २००३ में फाइनल में पहुंचा था ,जहाँ होश में रह कर इस फाइनल को जीता जा सकता था .पर होश से अधिक हम लोगों ने जोश से काम लिया .

2003 का वर्ल्ड कप

 2003 का यह मैच  एक 14-टीम इवेंट था और केन्या और जिम्बाब्वे जैसी टीमों ने सभी बाधाओं को पार कर के   सुपर सिक्स तक पहुंच गई।

इंग्लैंड ने राजनीतिक कारणों से जिम्बाब्वे के खिलाफ अपनी मुठभेड़ को रोक दिया जिससे उन्हें सुपर सिक्स स्टेज तक पहुंचने में मदद मिली। केन्या ने अपने मैच  में श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी टीमों को हराया।

कुछ टीमों ने निर्धारित मैचों के लिए केन्या जाने से परहेज किया; इसलिए उन्हें खेल के लिए मजबूर करने से केन्या को टूर्नामेंट के अगले चरण तक पहुंचने में मदद मिली। इसके बाद वे सेमीफाइनल में पहुंच गए क्योंकि वे उच्च रैंकिंग वाले जिम्बाब्वे को हराने में कामयाब रहे, जबकि ग्रुप मैच खेले जाने  से आगे आने वाले अंकों से भी फायदा हुआ।

केन्या विश्व कप में खेलने वाला एक मात्र गैर टेस्ट खेले वाला देश है ,जब की वह सेमीफाइनल में भारत से ९१ रन से हार गए .सौरव गांगुली ने एक मैच में शतक बनाया . यह एक ऊँचा सपना देखने वाले के लिए एक अंत था ,जिस से वह दूर हो गए . सौरव का पहले बॉलिंग का फ़ैसला आज भी सालता है. वो शायद पहली बार था जब पूरे देश को लगने लगा था कि हम बहुत कुछ कर सकते हैं. और ऐन मौके पर ही हम हार गए थे. ऐसा कभी कभी आत्मघाती भी सिद्ध हो सकता है. जॉन राइट के फॉर्म में हमें एक बेहतरीन गुरु ज़रूर मिल गया था. साथ ही गांगुली की कप्तानी भी काफी मैच्योर हो जाने वाली थी. पहले बॉलिंग करने के इस एक ग़लत डिसीज़न से वो काफ़ी कुछ आगे के लिए सीखा जा सकता है .

केन्या विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंचने वाला एकमात्र गैर-टेस्ट खेलने वाला देश है। हालांकि, वे सेमीफाइनल में 91 रन से भारत से हार गए क्योंकि भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने उस मुठभेड़ में एक शतक लगाया। यह आकांक्षी देश के लिए चलाए गए एक सपने का अंत था, लेकिन वे टूर्नामेंट से दूर चले गए, जिनके सिर ऊंचे थे।टूर्नामैंट के पहले सेमीफानल मुकाबला पोर्ट एलिजाबेथ में आस्ट्लिया और श्रीलंका के बीच 18 मार्च 2003 को खेला गया। पोर्ट एलिजाबेथ की मुश्किल पिच पर आस्टृलियाई कप्तान ने टाॅस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। श्रीलंकाई गेंदबाजों की बेहतरीन कसी हुई गेंदबाजी  के कारण आस्टृलियाई टीम अपने निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर केवल 212 रन ही बना सकी। जबाव में श्रीलंकाई टीम की बल्लेबाजी भी धाराशयी हो गई। पारी के 39वें ओवर में वर्षा ने खलल डाल दिया और मैच दुबारा शुरू नहीं किया जा सका। और इस प्रकार डक वर्थ लुईस पदति के आधार पर आस्ट्लियाई टीम 48 रनों से मुकाबला जीत कर फ़ाइनल में पहुंचने में कामयाब रहीं।

२००३ विश्व कप की यह यादें जहाँ हर भारतीय के दिल में एक कसक बन कर उभरती है वहां यह बहुत कुछ सीख भी दे जाती है ,इसलिए २००३ का यह वर्ड कप अपनी खट्टी मीठी यादों को समेटे हुए यूँ ही हमारे साथ रहेगा .

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